सुपर किटिकल थर्मल पॉवर प्लांट छबड़ा जिला बारां से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) का परिवहन अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। फोरलेन नेशनल हाईवे- पर रोजाना गिरती राख और उड़ते गुबार ने राहगीरों का दम घोंट दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह पूरा खेल प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की मिलीभगत से चल रहा है।

बिना परमिट और अनफिट गाड़ियाँ सड़कों पर

जांच में सामने आया है कि फ्लाई ऐश ढोने वाली अधिकांश गाड़ियों के पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही आरटीओ (RTO) का वैध परमिट। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग की आंखों के नीचे पुरानी और अवैध रूप से मॉडिफाइड की गई गाड़ियाँ धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। सड़कों के किनारे जगह-जगह राख के ढेर लगे हैं, जिससे विजिबिलिटी कम हो रही है और आए दिन हादसे हो रहे हैं।

CPCB की ‘ग्रीन गाइडलाइंस’ केवल कागजों पर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्पष्ट गाइडलाइंस के अनुसार:
फ्लाई ऐश का परिवहन पूरी तरह से बंद ट्रकों या कवर्ड टैंकरों में होना चाहिए।
गाड़ियों से किसी भी तरह का लीकेज या स्पिलेज नहीं होना चाहिए।
सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव जरूरी है।
लेकिन NH-पर स्थिति इसके उलट है। खुले ट्रकों से गिरती राख पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है।

जनता की प्रशासन से सीधी मांग

  • बढ़ते प्रदूषण और हादसों से आक्रोशित जनता ने प्रशासन से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
    जब्ती की कार्रवाई: अवैध रूप से मॉडिफाइड और बिना फिटनेस वाली गाड़ियों को तुरंत जब्त किया जाए।
    सख्त निगरानी: परिवहन विभाग NH- पर चेक पोस्ट लगाकर इन गाड़ियों के परमिट की जांच करे।
    नियमों का पालन: राख परिवहन के लिए निर्धारित ग्रीन गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो।
    स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस “अवैध खेल” को बंद नहीं किया, तो वे हाईवे जाम कर उग्र प्रदर्शन करेंगे।

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