प्रशासन ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से एक ही मलाईदार या ‘संवेदनशील’ अनुभागों में जमे इंजीनियरों और कर्मचारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया गया है।
आदेश संख्या 723 जारी
निगम के ध्यान में आया है कि कई कर्मचारी ट्रांसफर पॉलिसी को ताक पर रखकर सालों से खरीद (Procurement), स्टोर, ईंधन (Fuel) और फ्लाई ऐश जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ‘कुंडली मारकर’ बैठे हैं। इन पदों पर लंबे समय तक बने रहने से न केवल पारदर्शिता प्रभावित हो रही थी, बल्कि भ्रष्टाचार की शिकायतें भी बढ़ रही थीं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने आदेश संख्या 723 जारी कर तत्काल प्रभाव से बदलाव के संकेत दिए हैं।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य रोटेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू करना है। निगम का मानना है कि संवेदनशील विभागों में समय-समय पर स्टाफ बदलने से कामकाज में निष्पक्षता आएगी और किसी भी प्रकार के गठजोड़ (Nexus) को तोड़ा जा सकेगा।
नियमानुसार, केमिकल विंग के इंजीनियरों और कर्मचारियों की खरी(Procurement), स्टोर, ईंधन (Fuel) और फ्लाई ऐश बिक्री अनुभाग में अधिकतम तैनाती केवल दो वर्ष की हो सकती है। जवाबदेही तय: लंबे समय से एक ही विभाग में जमे रहने वाले इंजीनियरों और अधिकारियों की सूची तैयार।
कार्यकुशलता में सुधार: रोटेशन के जरिए भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म करना और नए लोगों को जिम्मेदारी सौंपना।
प्रशासनिक हलचल:
इस आदेश के बाद निगम के गलियारों में हड़कंप मच गया है। विशेष रूप से वे अधिकारी रडार पर हैं, जो स्टोर और फ्यूल मैनेजमेंट जैसे ‘मलाईदार’ पदों पर रसूख के दम पर टिके हुए थे। CMD के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में RVUNL की कार्यप्रणाली में कई और बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं।
